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Thursday, October 29, 2020

Micro & Macro Economics

     व्यष्टि/सूक्ष्म अर्थशास्त्र 

     Micro Economics 

        माइक्रो शब्द ग्रीक भाषा के माइक्रोस शब्द से बना है जिसका अर्थ है छोटा, इस प्रकार Micro Economics छोटी इकाइयों से संबंधित है। 

      व्यष्टि अर्थशास्त्र में किसी अर्थव्यवस्था की विभिन्न छोटी - छोटी इकाइयों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन या विश्लेषण किया जाता है। दूसरे शब्दों में सूक्ष्म अर्थशास्त्र के अंतर्गत विशेष व्यक्तियों, परिवार, उद्योगों और विशेष श्रमिक आदि का विश्लेषण किया जाता है। 


प्रो. बोलडिंग ने अपनी पुस्तक आर्थिक विश्लेषण में 

लिखा है कि " व्यष्टिगत अर्थशास्त्र के अंतर्गत विशेष फर्मों, विशेष परिवारों व्यक्तिगत क़ीमतों, मजदूरियों, आय आदि वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है।" 


हैंडर्सन क्वाण्ट के शब्दों में " व्यष्टिगत अर्थशास्त्र व्यक्तियों के सुपरिभाषित समूहों के आर्थिक कार्यो का अध्ययन है।" 

        इन परिभाषाओं से स्पष्ट है कि व्यष्टि अर्थशास्त्र का संबंध किसी एक इकाई से होता है सभी इकाइयों से नहीं। इसमें योगों का अध्ययन किया जाता है लेकिन ये योग सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था से संबंधित नहीं होते। 

          संक्षेप में कहा जा सकता है कि व्यष्टि या सूक्ष्म अर्थशास्त्र आर्थिक विश्लेषण की वह शाखा है जो अर्थव्यवस्था के छोटे भागों और उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है। कुछ अर्थशास्त्री इसे क़ीमत सिद्धांत का नाम देते हैं जिसके अंतर्गत माँग एवं पूर्ति द्वारा विभिन्न वस्तुओं के व्यक्तिगत मूल्य निर्धारित किए जाते हैं। 


         समष्टि  / वृहत  अर्थशास्त्र

                 Macro Economics 


सन् 1929-30 की विश्वव्यापी आर्थिक मंदी की स्थिति और प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के पूर्ण रोजगार के सिद्धान्त की असफलता के कारण प्रो. जे. एम. कीन्स ने ‘सामान्य सिद्धान्त’ की रचना की थी। प्रो. कीन्स के अनुसार- “राष्ट्रीय तथा विश्वव्यापी आर्थिक समस्याओं का अध्ययन समष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाना चाहिए।” इस प्रकार समष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था का अध्ययन समग्र रूप से किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुल राष्ट्रीय आय, कुल मागँ , कुल पूर्ति कुल बचत, कुल विनियोग, पूर्ण रोज़गार इत्याद। इसे कुल याेग संबधी अथवा सामूहिक अर्थशास्त्र भी कहते हैं ।


समष्टि अर्थशास्त्र में समस्त आर्थिक क्रियाओं का संपूर्ण रूप से अध्ययन किया जाता है। राष्ट्रीय आय, उत्पादन, रोज़गार/बेरोज़गारी, व्यापार चक्र, सामान्य क़ीमत स्तर, मुद्रा संकुचन, आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आदि आर्थिक क्रियाओं का विश्लेषण इसके अंतर्गत किया जाता है।




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