उत्पादन से आशय Meaning of Production
उत्पादन एक ऐसी प्रकिया है जिसमें उत्पादन के अलग अलग साधनों ( भूमि, श्रम, पूँजी, मशीन एवं कच्चा माल) का इस्तेमाल करके वस्तु या सेवा का उत्पादन किया जाता है। उत्पादन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आगतों(Inputs) को निर्गत(Output) में बदला जाता है। एक उत्पादक विभिन्न आगतोंं के मेल से निर्गत
उत्पादन करता है और फिर इस निर्गत का उपयोग उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है या कोई दूसरी फर्म इस निर्गत का उपयोग आगे के उत्पादन के लिए करती है। उदाहरण के लिए एक बस या ट्रक निर्माता भूमि का उपयोग फैक्ट्री के लिए करता है और अन्य आगत जैसे स्टील, श्रम, एल्युमिनियम, रैकसीन, रबर, मशीन आदि का इस्तेमाल बस एवं ट्रक के उत्पादन में करता है। एक किसान अपनी भूमि,श्रम,बीज,खाद पानी तथा ट्रैक्टर का उपयोग अनाज के उत्पादन के लिए करता है। एक सेवक अपने श्रम का उपयोग रसोई में भोजन के उत्पादन में करता है।
यहां पर एक तथ्य को भूलना नहीं चाहिए कि मनुष्य किसी पदार्थ का निर्माण नहीं कर सकता। पदार्थ अपने मूलरूप में प्रकृति की देन होता है मनुष्य केवल उसका रूप बदल कर नयी वस्तुएं तैयार करता है। प्रो मार्शल के अनुसार, मनुष्य पदार्थ उत्पन्न नहीं कर सकता, वह केवल उसके अंदर विद्यमान उपयोगिता का सृजन कर सकता है। (Man can not produce matter but only utility inherent in matter.) अर्थशास्त्र में उत्पादन से आशय उपयोगिता का सृजन(creation of utility) है।
उत्पादन के घटक (Factors of Production)
उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग में आने वाले आगत (Inputs) को उत्पादन के कारक या घटक कहते हैं जैसे भूमि, श्रम, पूँजी एवं साहसी आदि। इन कारकों को इनकी सेवा के लिए क्रमशः किराया, वेतन, ब्याज एवं लाभ प्राप्त होता है। उत्पत्ति के साधनों (घटक) (Factors of Productions) को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है–
1) स्थिर घटक (Fixed Factors)
2) परिवर्तनशील/परिवर्ती घटक (Variable Factors)
1) स्थिर घटक (Fixed Factors)– ऐसे कारक जिनमें उत्पादन के स्तर के साथ कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता उनको स्थिर घटक कहा गया है। जैसे भूमि और मशीनरी एवं बिल्डिंग आदि।
2) परिवर्तनशील/परिवर्ती घटक (Variable Factors) – ऐसे घटक जिनमें उत्पादन के स्तर के साथ परिवर्तन किया जा सकता है उनको परिवर्तनशील घटक कहा गया है। जैसे श्रम, कच्चा माल, पूँजी आदि।
उत्पादन फलन Production Function
किसी भी प्रकार का उत्पादन उत्पत्ति के विभिन्न साधनों के अनुपात पर निर्भर होता है। जिस वस्तु का उत्पादन होता है उसे अर्थशास्त्र में उत्पाद या निर्गत Input कहा जाता है और जिन साधनों द्वारा उत्पादन किया जाता है उनको उपादान या आगत Output कहते हैं। इस तरह उत्पादन फलन (Production Function) उपयोग में लाए गए आगत एवं फर्म द्वारा उत्पादित निर्गत का फलनात्मक संबंध है। किसी फर्म का उत्पादन फलन उत्पादन तकनीक(technique)या प्रौद्योगिकी पर आधारित होता है। उत्पादन का अधिकतम होना तकनीक के स्तर पर निर्भर करता है और एक नया उत्पादन फलन भी प्राप्त होता है जो उत्पादन के नए उच्चतम स्तर को बताता है। इस प्रकार उत्पादन फलन हमें बताता है कि एक निश्चित समयावधि में उत्पादन के साधनों में परिवर्तन करने से उत्पादन की मात्रा में कितना परिवर्तन हुआ।
प्रो. लेफ्टविच — " उत्पादन फलन का अभिप्राय फर्म के उचित साधनों और प्रति समय इकाई वस्तुओं और सेवाओं के बीच का भौतिक संबंध है जबकि मूल्यों को छोड़ दिया जाए।"
उत्पादन फलन को गणितीय रूप में इस तरह दर्शाते हैं–
Qx = f (L, K)
Qx = वस्तु की उत्पादित इकाइयां
L = श्रम (Labour)
K = पूँजी (Capital)
( यहां सिर्फ श्रम तथा पूँजी को ही उत्पादन के लिए ज़रूरी समझा गया है।)
उदाहरण – एक किसान गेहूँ के उत्पादन के लिए सिर्फ़ दो आगतों भूमि और श्रम का उपयोग करता है तो इसका उत्पादन फलन गेहूँ की उस अधिकतम मात्रा को बताएगा जो दी गयी भूमि और दिये गये काम के घंटों में श्रम द्वारा उत्पन्न किया गया है। माना कि एक हेक्टेयर भूमि पर वह किसान 2 घंटे कार्य करता है जिससे 2 टन गेहूँ की पैदावार होती है तो अब इस सम्बंध को जिस फलन से बताया जाएगा वही उत्पादन फलन हुआ।जैसे–
Q = K, L
यहाँ,
Q = गेहूँ की मात्रा
K = भूमि हेक्टेयर में
L = कार्य के घंटे
यदि K अथवा L में वृद्धि होती है तो Q की मात्रा भी बढ़ेगी।
उत्पादन में समयावधि की अवधारणा
Concept of Time Period in Production
उत्पादन में लगने वाले समय को इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है –
1) अतिलघु अवधि या बाज़ार अवधि –
(Very Short Period / Market Period) –
अति अल्प काल में उत्पादन के किसी भी कारक को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है इसलिए इस अवधि में उत्पादन के स्तर में भी कोई बदलाव नहीं आता है।
2) लघु अवधि या अल्पकाल –
(Short Period) – अल्पकाल में उत्पादन के सभी कारक बदले नहीं जा सकते हैंं सिर्फ़ परिवर्तनशील कारक ही बदले जा सकते हैं जैसे श्रम। इस अवधि में उत्पादन केवल एक सीमित स्तर तक ही प्रभावित होता है।
3) दीर्घ अवधि या दीर्घकाल –
(Long period) – दीर्घ अवधि में उत्पादन के सभी साधनों में परिवर्तन संभव होता है। इस अवधि में कोई भी साधन स्थिर नहीं रहता बल्कि सभी साधन परिवर्तनशील होते हैं इसलिए उत्पादन को किसी भी स्तर तक प्रभावित किया जा सकता है ।
अल्पकाल या दीर्घकाल को दिनों, महीनों और वर्षों में परिभाषित करना सही नहीं होगा। अल्पकाल और दीर्घकाल को केवल इस दृष्टि से परिभाषित किया जाना सही है कि उत्पादन के सभी आगत Inputs परिवर्तनशील हैं या नहीं।
उत्पादन की माप
Measures of Production
1) कुल उत्पाद/कुल भौतिक उत्पाद
TOTAL PRODUCTION ( TP ) – एक निश्चित समय में कोई फर्म उत्पादन के सभी साधनों द्वारा जो उत्पादन करती है उसे कुल उत्पादन कहा जाता है।
कुल उत्पाद (TP) = ∑MP
यहाँ पर, ∑MP = सीमांत उत्पादों का योग
2) सीमांत उत्पाद/सीमांत भौतिक उत्पाद
MARGINAL PRODUCTION ( MP )–
उत्पादन के अन्य साधनों को स्थिर रख कर परिवर्तनशील साधनों की एक अतिरिक्त इकाई को बढ़ाने से कुल उत्पादन में जो वृद्धि होती है उसे सीमांत उत्पादन कहा जाता है।
सीमांत उत्पाद (MP) = TPₙ - TPₙ - 1
यहाँ पर, TPₙ =N परिवर्ती घटकों पर कुल उत्पादन
TPₙ - 1= N - 1 परिवर्ती घटकों पर कुल उत्पादन
अथवा MP = ∆TP/∆L
यहाँ पर, MP = सीमांत उत्पाद
∆TP = कुल उत्पाद में परिवर्तन
∆L = श्रम की इकाइयों में परिवर्तन
3) औसत उत्पाद/औसत भौतिक उत्पाद
AVERAGE PRODUCTION (AP) –
अल्पकाल में किसी फर्म के परिवर्तनशील साधनों के प्रति इकाई उत्पादन को औसत उत्पादन कहा जाता है। कुल उत्पाद को परिवर्तनशील साधनों की कुल इकाइयों से विभाजित करके औसत उत्पाद की गणना की जाती है। औसत उत्पाद ऋणात्मक हो सकता है लेकिन शून्य नहीं हो सकता है।
औसत उत्पाद (AP) = TP/L
यहाँ पर, TP = कुल उत्पाद
L = श्रम की इकाईयाँ
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