माँग (Demand)
आम बोलचाल की भाषा में किसी वस्तु या सेवा को प्राप्त करने की इच्छा को ही माँग समझा जाता है। माँग इच्छा और आवश्यकता इन तीनों शब्दों का एक ही अर्थ निकाला जाता है लेकिन अर्थशास्त्र में इन तीनों शब्दों का अर्थ अलग अलग है। माँग का अर्थ वस्तु को खरीदने की वह इच्छा है जिसके लिए पर्याप्त क्रय शक्ति के साथ साथ ख़र्च करने की तत्परता भी हो।
माँग उन उत्पादों और सेवाओं की संख्या है जिसे एक उपभोक्ता ख़रीदना चाहता है। उदाहरण के लिए एक ग़रीब इंसान का इंग्लैंड जाने की कल्पना या विचार इच्छा है जबकि अमीर व्यक्ति अपने साधनों से हवाई जहाज़ का टिकट लेना चाहता है तो यह उसकी आवश्यकता कहलाएगी। चूँकि वह टिकट ख़रीदने में सक्षम है और जब वह टिकट ख़रीद लेता है तो आवश्यकता माँग के रूप में बदल जाती है।
माँग की परिभाषा Definition of Demand
प्रो. जे. एस. मिल - " माँग शब्द का अभिप्राय मांगी गई उस मात्रा से लगाया जाता है जो एक निश्चित क़ीमत पर ख़रीदी जाती है।"
" Demand is an amount of a thing which a person is willing to buy at a given price."
__ J. S. Mill
प्रो बेन्हम - " किसी दी गई क़ीमत पर वस्तु की माँग वह मात्रा है जो उस क़ीमत पर एक निश्चित समय पर ख़रीदी जाती है। "
" The demand for anything, at a given price is the amount of it which will be bought per unit of time at that price."
__ Benham
प्रो. मेयर्स -" किसी वस्तु की माँग उन मात्राओं की तालिका होती है जिन्हें क्रेता एक समय विशेष पर सभी संभव क़ीमतों पर खरीदने को तैयार रहता है।"
" The demand for a good is a schedule of the amounts that buyers would be willing to purchase at all possible prices at any one instant of time.''
__ Meyers
इन परिभाषाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि माँग में निम्नलिखित पांच तत्वों का होना अनिवार्य है —
1) वस्तु की इच्छा (Desire for a good)
2)वस्तु खरीदने के लिए पर्याप्त साधन (Sufficient resources to buy the goods)
3) साधन व्यय करने की तत्परता (Willingness to spend)
4) एक निश्चित क़ीमत (Given price)
5) निश्चित समयावधि (Given time period)
माँग तालिका/माँग सारणी/ माँग अनुसूची
Demand schedule/table
माँग तालिका एक निश्चित समय में किसी वस्तु की माँगी जाने वाली मात्रा को दर्शाती है । माँग तालिका वस्तु के मूल्य एवं माँँग गयी मात्रा में संबंध को व्यक्त करती है । माँग अनुसूची दो प्रकार की होती है —
1. व्यक्तिगत माँग तालिका
2. बाज़ार माँग तालिका
1) व्यक्तिगत माँग तालिका ( Individual Demand Schedule – इस तालिका से किसी एक व्यक्ति द्वारा किसी समय में विभिन्न मूल्यों पर मांगी जाने वाली वस्तु की मात्रा की जानकारी मिलती है। व्यक्तिगत माँग तालिका में बायीं ओर वस्तु के मूल्य को और दायीं ओर वस्तु की मांगी गयी मात्रा को दिखाया जाता है।
तालिका से स्पष्ट है कि जैसे - जैसे वस्तु की क़ीमत कम हो रही है वैसे - वैसे वस्तु की अधिक इकाइयों की माँग की जा रही है अर्थात मूल्य घटने पर माँग बढ़ रही है। इस प्रकार व्यक्तिगत माँग तालिका वस्तु के मूल्य और उसकी माँग के बीच विपरीत संबंध को स्पष्ट करती है।
2) बाज़ार माँग तालिका (Market Demand Schedule) – किसी निश्चित समय पर वस्तु की विभिन्न क़ीमतों पर समस्त बाज़ार की माँग को बताने वाली तालिका को बाज़ार माँग तालिका कहा जाता है ।दूसरे शब्दों में बाज़ार माँग तालिका किसी बाज़ार में किसी वस्तु की अलग-अलग क़ीमतों पर सभी ग्राहकों की कुल माँग को प्रदर्शित करती है। इसे व्यक्तिगत माँग तालिकाओं की सहायता से तैयार किया जाता है।
बाज़ार माँग तालिका
इस तालिका में उपभोक्ता x,y और z की व्यक्तिगत माँग के योग को अंतिम काॅलम दिया गया है जिसे बाज़ार माँग कहते हैं।
माँग वक्र या माँग रेखा
Demand Curve
जब हम माँग तालिका को रेखाचित्र द्वारा प्रदर्शित करते हैं तो हमें माँग वक्र प्राप्त होता है। इस तरह माँग वक्र माँग तालिका का रेखीय प्रदर्शन है।
माँग तालिका की तरह माँग वक्र भी किसी वस्तु के मूल्य और उसकी माँग के मध्य विपरीत संबंध को दर्शाता है।
माँग वक्र में परिवर्तन
Change in Demand Curve
किसी वस्तु की माँग में परिवर्तन के मुख्य दो कारण होते हैं पहला स्वयं उसी वस्तु के मूल्य में परिवर्तन और दूसरा कारण है अन्य तत्वों में आने वाला परिवर्तन। जिसमें उपभोक्ता की आय, पूरक तथा स्थानापन्न वस्तुओं की क़ीमत एवं भविष्य में क़ीमत बढ़ने या घटने की आशा आदि बातें शामिल होती हैं। इसकी व्याख्या निम्नलिखित है -
1) माँग वृद्धि होना (अन्य तत्वों में परिवर्तन के कारण)
2) माँग में कमी आना (अन्य तत्वों में परिवर्तन के कारण)
3) माँग का विस्तार होना (स्वयं वस्तु के मूल्य में परिवर्तन के कारण)
4) माँग का संकुचन होना (स्वयं वस्तु के मूल्य में परिवर्तन के कारण)
1)माँग में वृद्धि (Increase in demand)
जब वस्तु के मूल्य में कोई बदलाव न आये लेकिन दूसरे तत्वों में से किसी एक में बदलाव की वजह से उस वस्तु की माँग बढ़ जाए तो ये स्थिति माँग में वृद्धि की स्थिति कहलाती है और मांग में वृद्धि की स्थिति में माँग वक्र बाएं से दाएं खिसक (shift) जाता है।
इस चित्र से स्पष्ट है कि वस्तु की क़ीमत में
कोई परिवर्तन नहीं आया है लेकिन किसी अन्य तत्व में परिवर्तन की वजह से वस्तु की माँग 80 इकाइयों से बढ़कर 115 इकाइयों पर पहुंच गई है और माँग वक्र D से खिसक कर D2 पर शिफ्ट हो गया है।
कारण –
उपभोक्ता की आय में वृद्धि
स्थानापन्न वस्तुओं का मूल्य बढ़ना
पूरक वस्तुओं की क़ीमत कम हो जाना
भविष्य में वस्तु की क़ीमत बढ़ने की आशा
2) माँग में कमी (Decrease in demand)
जब वस्तु की क़ीमत वही रहे लेकिन कुछ अन्य तत्वों में आने वाले परिवर्तन की वजह से उस वस्तु की माँग कम हो जाए तो यह स्थिति माँग में कमी की स्थिति कहलाती है और माँग की कमी के कारण माँग वक्र अपने बाएं खिसक कर पीछे की तरफ शिफ्ट हो जाता है।
इस रेखाचित्र से स्पष्ट है कि वस्तु की क़ीमत में कोई भी बदलाव नहीं आया है लेकिन किसी अन्य तत्व में परिवर्तन की वजह से वस्तु की माँग 115 इकाइयों से घट कर 80 इकाइयों पर आ गई है और माँग वक्र D से खिसक कर पीछे D2 पर शिफ्ट हो गया है।
कारण –
उपभोक्ता की आय का कम हो जाना
स्थानापन्न वस्तुओं की क़ीमत कम हो जाना
पूरक वस्तुओं का मूल्य बढ़ जाना
भविष्य में वस्तु की क़ीमत घटने की आशंका
3)माँग का विस्तार(Expansion of demand)
जब अन्य तत्वों में कोई बदलाव न आए लेकिन स्वयं वस्तु की क़ीमत घटने के कारण वस्तु की माँग बढ़ जाये तो इसे माँग का विस्तार कहा जाता है ऐसी स्थिति में माँग वक्र अपनी जगह से नहीं खिसकता। केवल माँग अपने दायींं ओर आ जाती है और क़ीमत नीचे की तरफ आ जाती है।
इस रेखाचित्र से स्पष्ट है कि वस्तु की क़ीमत ₹ 16 से कम होकर ₹ 12 हो गई है जिसकी वजह से वस्तु की माँग 60 इकाइयों से 80 इकाइयों तक बढ़ गई है। माँग वक्र अपने स्थान पर है लेकिन वक्र पर माँग का बदलाव देखा जा सकता है। वर्तमान माँग बिन्दु A से खिसक कर बिन्दु B पर आ गई है। इसे ही माँग का विस्तार कहते हैं।
4)माँग में संकुचन(Contraction of demand)
जब अन्य तत्वों में कोई बदलाव न आया हो लेकिन स्वयं वस्तु की क़ीमत बढ़ने के कारण वस्तु की माँग घट जाए तो इसे माँग में संकुचन होना कहा जाता है। माँग संकुचन की स्थिति में भी माँग वक्र अपने स्थान से नहीं खिसकता है। केवल माँग बायीं तरफ आ जाती है और क़ीमत ऊपर की ओर बढ़ती है।
रेखाचित्र से स्पष्ट है कि वस्तु की क़ीमत ₹12 से बढ़ कर ₹16 हो गई है जिसकी वजह से वस्तु की माँग 80 इकाइयों से घटकर 60 इकाइयों पर आ गई है। माँग वक्र
अपने स्थान पर है लेकिन वर्तमान मागँ बिन्दु A से बिन्दु B पर बन गई है जिसे माँग में संकुचन होना कहा जाता है।