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Monday, November 30, 2020

माँग की लोच Elasticity of Demand

       माँग की मूल्य सापेक्षता अथवा माँग की लोच का अर्थ

Meaning of Elasticity of Demand

माँग की लोच का विचार हमे बताता है कि एक वस्तु के मूल्य में परिवर्तन होने से उस वस्तु की माँग में कितना परिवर्तन होता है। माँग का नियम केवल इतना बताता है कि मूल्य के बढ़ जाने से वस्तु की माँग घट जाती है और मूल्य के घट जाने से वस्तु की माँग बढ़ जाती है। माँग का नियम ये नहीं बताता कि क़ीमत में बदलाव आने पर माँग की मात्रा में कितना परिवर्तन होता है अतः इस तथ्य को जानने के लिए अर्थशास्त्रियों ने मांग की लोच की धारणा को प्रस्तुत किया । लोच शब्द का अर्थ है वस्तु में घटने और बढ़ने की प्रवृत्ति जैसे रबड़, जिस पर दबाव डालने से खिंचाव पैदा हो जाता है और दबाव कम करने पर वापस अपनी स्थिति में आ जाता है। माँग की लोच क़ीमत में परिवर्तन के कारण माँग में होने वाले परिवर्तन की माप प्रस्तुत करती है। 

माँग की लोच की परिभाषाएं Definitions of Elasticity of Demand 

जे के मेहता के अनुसार, "किसी वस्तु के मूल्य में परिवर्तन के परिणामस्वरूप उसकी मांग में परिवर्तन होने की क्षमता को माँग की मूल्य सापेक्षता कहते हैं।" 

प्रो मार्शल के अनुसार, "बाज़ार में किसी वस्तु की माँग का अधिक या कम लोचदार होना इस बात पर निर्भर होता है कि एक निश्चित मात्रा में मूल्य के घट जाने पर माँग की मात्रा में अधिक वृद्धि होती है अथवा कम तथा एक निश्चित मात्रा में मूल्य के बढ़ जाने पर माँग की मात्रा में अधिक कमी होती है या कम। "

प्रो बेन्हम के अनुसार, "माँग की लोच का विचार, मूल्य में थोड़ा सा परिवर्तन होने से माँग की मात्रा पर जो प्रभाव पड़ता है, उससे संबंधित है।" 

माँग की लोच के रूप Kinds of Elasticity of Demand 

माँग की लोच के निम्नलिखित तीन रूप हैं —
1) माँग की क़ीमत लोच Price Elasticity of Demand - वस्तु के मूल्य में थोड़े से परिवर्तन के फलस्वरूप माँग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन की माप को माँग की क़ीमत लोच कहते हैंं। 

2) माँग की आय लोच Income Elasticity of Demand - उपभोक्ता की आय में थोड़े से परिवर्तन के कारण माँग की मात्रा में होनेे वाले परिवर्तन की माप को मांग की आय लोच कहा जाता है ।

3) माँग की आड़ी लोच Cross Elasticity of Demand - संबंधित वस्तुओं की क़ीमत में थोड़ा सा परिवर्तन होने के फलस्वरूप माँग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन की माप को माँग की आड़ी लोच कहते हैं। 

माँग की क़ीमत लोच की श्रेणियां Categories or Degrees of Elasticity of Demand 

सभी प्रकार की वस्तुओं में माँग की लोच एक समान नहीं होती है अलग - अलग क़िस्म की वस्तुओं के लिए माँग की लोच भी अलग अलग प्रकार की होती है जिसे 
पाँच श्रेणियों में विभाजित किया गया है –
1- पूर्णतः लोचदार माँग Perfectly Elastic Demand 
2- अत्यधिक लोचदार माँग Highly Elastic Demand 
3- इकाई लोचदार माँग Unitary Elastic Demand
4- बेलोचदार माँग Inelastic Demand 
5-  पूर्णतः बेलोचदार माँग Perfectly Inelastic Demand 

1) पूर्णतः लोचदार माँग Perfectly Elastic Demand ( e = ∞ ) – 



जब किसी वस्तु की क़ीमत स्थिर रहे या केवल नाम मात्र ही बदले फिर भी मांग काफ़ी बढ़ जाए या काफ़ी घट जाये तो इसे पूर्णतः लोचदार माँग या पूर्णतः मूल्य सापेक्ष माँग कहते हैं। इस प्रकार की माँग काल्पनिक है और वास्तविक जीवन में इसका कोई उदाहरण नहीं मिलता।
चित्र में DD माँग रेखा है जो कि आधार रेखा X - अक्ष के समांतर है OP क़ीमत पर माँग कभी OQ है और कभी OQ₁ । स्पष्ट है कि क़ीमत में परिवर्तन ना के बराबर है लेकिन वस्तु की माँग कभी घटी है तो कभी बढ़ी है। मार्शल ने इसे असीमित या अनंत के बराबर 
( e = ∞ ) बताया है। 

2- अत्यधिक लोचदार माँग Highly Elastic Demand ( e > 1 ) – 
    


जब किसी वस्तु की क़ीमत में परिवर्तन कम अनुपात में हो और उसकी माँग में क़ीमत के मुक़ाबले अधिक अनुपात में परिवर्तन हो जाये तो इसे अत्यधिक लोचदार
माँग कहते हैं। उदाहरण के लिए एक वस्तु की क़ीमत में 5% की कमी हो लेकिन उसकी माँग 30% बढ़ जाये तो ऐसी माँग अत्यधिक लोचदार माँग कहलाती है। इस प्रकार की माँग लोच प्रायः विलासिता की वस्तुओं में पायी जाती है। 
चित्र से स्पष्ट है कि OP₁ क़ीमत पर माँग OQ₁ है और जब क़ीमत घट कर OP₂ होती है तो माँग बढ़ कर OQ₂ हो जाती है क़ीमत में P₁ P₂ कमी आयी है जो
कि काफी कम (5%) है जबकि वस्तु की माँग Q₁Q₂बढ़ी है जो क़ीमत की तुलना में कहीं अधिक (30%) है। चित्र में DD अत्यधिक लोचदार माँग रेखा है। 


3- इकाई लोचदार माँग Unitary Elastic Demand ( e = 1 ) –


जब किसी वस्तु की माँग में उसी अनुपात में परिवर्तन हो जिस अनुपात में क़ीमत में परिवर्तन हुआ है तो ऐसी वस्तुओं की मांग लोचदार माँँग कहलाती है। इसे मूल्य सापेक्ष मांग भी कहते हैं। इस प्रकार की माँग लोच आरामदायक वस्तुओं ( जैसे - स्कूटर, टी वी, कूलर आदि) में पायी जाती है। उदाहरण के लिए अगर किसी वस्तु की क़ीमत 10% घटती है और माँग भी 10% बढ़ जाये तो माँग लोच इकाई के बराबर होती है 
चित्र से स्पष्ट है कि क़ीमत में P₁P₂ कमी होने पर वस्तु की माँग Q₁Q₂ बढ़ जाती है। चूँकि P₁P₂ =Q₁Q₂ इसलिए माँग की लोच इकाई के बराबर होगी। 

4- बेलोचदार माँग Inelastic Demand( e < 1)

 


जब किसी वस्तु की माँग में आनुपातिक परिवर्तन क़ीमत के आनुपातिक परिवर्तन से कम होता है तो इस तरह की माँग बेलोचदार माँग या मूल्य निरपेक्ष माँग कहलाती है। 
समान्य रूप से अनिवार्य एवं आवश्यक वस्तुओं की माँग बेलोचदार होती है जैसे - अनाज, नमक आदि। 
उदाहरण के लिए एक वस्तु की क़ीमत 30% कम हो जाए लेकिन उस वस्तु की माँग केवल 5% ही बढ़े तो इसे मूल्य निरपेक्ष माँग कहेंगे। 
चित्र में क़ीमत में P₁P₂(30%) की कमी होने पर माँग सिर्फ़ Q₁Q₂ (5%) ही बढ़ी है। P₁P₂ अधिक है
Q₁Q₂ से, इसलिये यह मूल्य निरपेक्ष अथवा बेलोचदार
माँग है। 


5-  पूर्णतः बेलोचदार माँग Perfectly Inelastic Demand ( e = 0 ) - 


 अगर किसी वस्तु की क़ीमत में बड़ा परिवर्तन आया है और फिर भी माँग में कोई बदलाव न आए अर्थात चाहेे क़ीमत बढ़े या घटे लेकिन माँग अपनी जगह स्थिर रहे तो ऐसी वस्तु की माँग पूर्णतः बेलोचदार माँग कहलाती है। जीवन रक्षक दवाओं एवं कुछ अनिवार्य वस्तुुओं की माँग पूर्णतः बेलोचदार कहलाती है जबकि यह माँग व्यावहारिक तौर पर कहीं भी देखने को नहीं मिलती। 

चित्र में DD पूर्णतः बेलोचदार माँग रेखा है जो आधार रेखा X- अक्ष के लम्बवत है। क़ीमत OP से बढ़ कर OP₂ और फिर OP₁ हो जाती है लेकिन माँग OD के बराबर ही बनी रहती है। माँग में कोई भी बदलाव नहीं आया है। 


माँग की क़ीमत लोच को प्रभावित करने वाले कारक /घटक 

Factors Affecting Elasticity of

Demand 

1. वस्तु की प्रकृति या स्वभाव Nature of goods 
 जिन वस्तुओं की आवश्यकता रोज़़ पड़ती है उनकी क़ीमत में परिवर्तन होने का माँग पर कम असर होता है जैसे अनाज, सब्ज़ियां, दूूध एवं दवाएं आदि। 
       जबकि विलासिता की वस्तुओं की क़ीमत में परिवर्तन का माँग पर बड़ा असर पड़ता है जैसे ए सी, फ्रिज, कार, बाइक आदि।

2. स्थानापन्न वस्तुओं का उपलब्ध होना Availability of Substitutes - 
जब किसी वस्तु की स्थानापन्न वस्तुएं बाज़ार में उपलब्ध होती हैं तो ऐसी वस्तुओं की माँग अधिक लोचदार होती है क्योंकि वस्तु की क़ीमत के बढ़ते ही उपभोक्ता उसके विकल्प खरीदना शुरू कर देते हैं जैसे नेस्कैफे का मूल्य बढ़ते ही लोग ब्रू काॅफ़ी का उपभोग करना चाहेंगे। 
   अगर स्थानापन्न वस्तुओं की क़ीमत में वृद्धि होगी तो लोग वापस पहली वस्तु खरीदना चाहते हैं । 

3. उपभोक्ता की आय Consumer's Income-
जिनकी आय कम होती है वे उपभोक्ता वस्तु की क़ीमत कम होने पर अधिक मात्रा ख़रीद सकते हैं जबकि ऐसे उपभोक्ता जिनकी आय ज़्यादा होती है वो बढ़ी हुई क़ीमत पर भी उस वस्तु को खरीदने की क्षमता रखते हैं।अतः उपभोक्ता की आय और उनकी प्रकृति भी किसी वस्तु की माँग की लोच को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण घटक है। 

4. वस्तु के मूल्य का स्तर Price level of any good - किसी वस्तुु की क़ीमत का स्तर भी मांग की लोच को प्रभावित करता है। अगर वस्तु टी वी, लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि है तो क़ीमत ज़्यादा होने के कारण क़ीमत में बदलाव का माँग पर काफी असर पड़ता है। 
      जबकि कम मूल्य की वस्तुओं के मूल्य में बदलाव का माँग पर प्रभाव न के बराबर होता है। 
 
 
      jabउ प भ    ।  है । । पू       र्ण की तः लोचदार माँग की स्थिति में माँग रेखा X- अक्ष के समांतर होती है। चित्र में DD रेखा पूर्णतः लोचदार माँग की रेखा है। OP क़ीमत पर माँग कभी OQ है और कभी OQ1 है 

  

  

      
   
 


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