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Wednesday, November 11, 2020

तटस्थता वक्र Indifference Curve

 अनाधिमान वक्र/उदासीनता वक्र/तटस्थता वक्र Indifference Curve

  अनाधिमान वक्र दो वस्तुओं के ऐसे संयोगों (bundles) का रेखा चित्र होता है जो उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्रदान करते हैं यह वक्र उपभोक्ता के व्यवहार को दर्शाता है।  उपभोक्ता को मिलने वाली उपभोग सामग्री से वक्र के किसी भी बिंदु पर उसे एक समान संतुष्टि मिलती है। अन्य शब्दों में, अनाधिमान वक्र उसे कहते हैं जिसके सभी बिंदुओं पर उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त हो अतः वह इनके प्रति उदासीन होता है तभी इस वक्र को तटस्थता वक्र एवं उदासीनता वक्र भी कहा जाता है।
            यह वक्र मुख्य रूप से दो वस्तुओं के बीच रुचि को दर्शाता है अगर उपभोक्ता एक वस्तु के उपभोग को बढ़ाना चाहता है तो उसे दूसरी वस्तु के उपभोग को घटाना होगा। 
उदाहरण के लिए - यदि एक बच्चे को निम्नलिखित में से कुछ भी दे दिया जाए तो उसे समान संतोष मिलता है - 
8 बिस्कुट            1 चॉकलेट 
6 बिस्कुट            2 चॉकलेट 
4 बिस्कुट            3 चॉकलेट 
2 बिस्कुट            4 चॉकलेट 
     अगर बच्चे को 8 बिस्कुट और 1 चॉकलेट मिलती है तो वह संतुष्ट है  यदि 6 बिस्कुट और 2 चॉकलेट मिले तब भी वह संतुष्ट है। इसी तरह  बिस्कुट और चॉकलेट के बाक़ी दो bundles से भी बच्चे को एक समान संतुष्टि मिलती है। अब अगर एक ऐसा वक्र खींचा जाए जो इन चारों बिंदुओं से होकर गुज़रे तो वह उस बच्चे के लिए उदासीनता वक्र होगा। 
           इसी तरह दूसरा उदाहरण लेते हैं। माना कि विजय के पास 1 पेन और 12 पेंसिल हैं  और उससे पूछा जाए कि एक और पेन के लिए वह अपनी कितनी पेंसिल दे देगा जिससे उसकी संतुष्टि पर कोई असर न पड़े अर्थात संतुष्टि का स्तर बना रहे और वह 6 पेंसिल देने के लिए मान जाता है  तो अब उसके पास 2 पेन तथा 6 पेंसिल होंगी और इन दोनों वस्तुओं के इस bundle से विजय उतना ही संतुष्ट है जितना पहले वाले bundle से था। इसे एक तालिका द्वारा समझा जा सकता है -  
           
     
       इस तालिका में दोनों वस्तुओं के अलग-अलग चार संयोग (bundles) दिए गए हैं जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि मिल रही है। विजय ने एक वस्तु (पेन) की अतिरिक्त इकाई के लिए दूसरी वस्तु (पेंसिल) की 6 इकाइयों का त्याग किया है। यह प्रतिस्थापन दर कहलाती है अतः 1 पेन की प्रतिस्थापन दर 6 पेंसिल है। 
         इसी तालिका को जब ग्राफ के रूप में दर्शाया जाता है तो वही उदासीनता वक्र कहा जाता है। 
   
  

              यह ग्राफ तालिक में दिखाए गए संयोगों को ही प्रस्तुत कर रहा है। जिनके प्रति उपभोक्ता तटस्थ है इसीलिए इसे तटस्थता वक्र कहते हैं। 


                               तटस्थता मानचित्र 

              Indifference Curve Diagram 

जब चित्र में एक से ज़्यादा तटस्थता वक्र दर्शाए जाते हैं तो इसे तटस्थता मानचित्र (Indifference Map) कहा जाता है। ये उपभोक्ता की संतुष्टि के अलग अलग स्तरों को दर्शाते हैं। 


   


 

                         तटस्थता वक्र की विशेषताएँ 

          Characteristics of Indifference Curve

1) तटस्थता वक्र की ढलान बाएँ से दाएँ नीचे की तरफ़ होती है  जिसका तात्पर्य है कि जब एक वस्तु का उपभोग बढ़ाया जाता है तो दूसरी वस्तु का उपभोग घटता है। 
2) तटस्थता वक्र मूल बिन्दु की ओर उत्तल  होता है जिसका कारण है जैसे जैसे नीचे आते हैं प्रतिस्थापन दर घटती जाती है। 
3) तटस्थता वक्र कभी दूसरे तटस्थता वक्र को काटते नहीं क्योंकि उच्च वक्र पर वस्तुओं के संयोग भी उच्च होते हैं और संतुष्टि भी अधिक होती है। 
4) उच्च तटस्थता वक्र संतुष्टि के उच्च स्तर को दर्शाता है। 
5) तटस्थता वक्र अपने दोनों अक्षों को छूता नहीं है। 


     
        

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