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Saturday, January 9, 2021

अपनी पहचान ज़माने में जुदा ही रखना

 राह अँधेरी ही सही दिल में उजाले रखना

फरेब ए तबस्सुम से ग़मों को टाले रखना

               अपनी पहचान ज़माने से जुदा ही रखना

               इसलिए पलकों पर कुछ ख़्वाब निराले रखना

नफरतों की धूप है और कोई भी साया नहीं 

प्यार से ही फ़क़त प्यार को संभाले रखना

                   दिल में ख़ामोशियों का शोर हो तो होने दे 

            क्योंकि लाज़िम है अब अल्फाज़ पे ताले रखना

  

                



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