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Monday, January 11, 2021

आपूर्ति की अवधारणा Supply 12th Economics

 पूर्ति का अर्थ एवं परिभाषा

Meaning&Definition 

        of Supply

पूर्ति किसी वस्तु की वह मात्रा है जिसे एक फर्म या उत्पादक एक निश्चित समयावधि में तय की गई क़ीमत पर बेचने के लिए तैयार हो जाता है। जबकि वस्तु की बिक्री और उसकी पूर्ति दोनों एक दूसरे से अलग-अलग हैं। पूर्ति किसी वस्तु की वह मात्रा है जो एक विक्रेता बेचना चाहता है न कि वह मात्रा जिसे वह वास्तव में बेचता है। वस्तु का स्टाॅक किसी विक्रेता के पास उपलब्ध वस्तु की कुल मात्रा को कहते हैं जिसे वह वर्तमान या भविष्य में विक्रय कर सकता है। 
माना कि फर्म 'लिबर्टी' के पास 2000 लेडीज़ शूज़ तैयार हैं तो यह फर्म का स्टाॅक  है । बाज़ार में लेडीज़ शूज़ की क़ीमत 500 रुपये है,इस क़ीमत पर फर्म 1000 लेडीज़ शूज़ बेचने के लिए तैयार है तो फर्म की पूर्ति 1000 लेडीज़ शूज़ हुई। यदि 500 रुपये के हिसाब से फर्म 'लिबर्टी' 1000 लेडीज़ शूज़ विक्रय करती है तो यह उसकी बिक्री हुई। 
इसी तरह यदि एक किसान 500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 50 क्विंटल चावल फरवरी माह में बेचना चाहता है तो चावल की 50 क्विंटल मात्रा ही चावल की पूर्ति कहलाती है माना कि वही किसान फरवरी माह सिर्फ़ 30 क्विंटल चावल की बिक्री कर पाता है तो 30 क्विंटल चावल की मात्रा चावल की बिक्री हुई ।
वस्तु की वह मात्रा जो किसी समय विशेष में बाज़ार में उपलब्ध होती है वस्तु का स्टाॅक कहलाती है। 
अगर सिर्फ़ ये कहा जाए कि बाज़ार में चावल की पूर्ति 1000 क्विंटल की है तो यह कथन ग़लत है क्योंकि चावल की क़ीमत तथा समय नहीं बताया जा रहा है। अब अगर इस तरह कहा जाए कि आज बाज़ार में 50 रुपये प्रति किलो के मूल्य पर चावल की पूर्ति 1000 क्विंटल की है तो यह कथन सही है। 
स्पष्ट है कि आपूर्ति के लिए निश्चित समय एवं निश्चित क़ीमत दोनों का बताना ज़रूरी है । 
प्रो. बेन्हम — " पूर्ति का आशय वस्तु की उस मात्रा से है जिसे प्रति इकाई समय में बेचने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।" 

              पूर्ति के प्रकार 
        Types of Supply 
पूर्ति के प्रकार निम्नलिखित हैं –
1)व्यक्तिगत पूर्ति
(Individual Supply) – किसी वस्तु की वह मात्रा जिसकी पूर्ति एक व्यक्तिगत फर्म के द्वारा किसी निश्चित समय पर विभिन्न मूल्यों पर की जाती है उसे व्यक्तिगत पूर्ति कहते हैं। जैसे- फर्म सेलो द्वारा जनवरी माह में 20,000 फ्लास्क की पूर्ति की गयी। 
   
2) बाज़ार पूर्ति (Market Supply) –  विभिन्न क़ीमतों पर किसी समय विशेष में सभी उत्पादकों या फर्मों द्वारा बाज़ार में किसी वस्तु की बिक्री के लिए जो मात्रा उपलब्ध करवायी जाती है उस मात्रा के योग को बाज़ार पूर्ति (Market Supply) कहते हैं। जैसे - सभी फर्मों द्वारा जनवरी माह में 80,000 फ्लास्क की पूर्ति की गयी। बाज़ार पूर्ति सभी फर्मों की पूर्ति का योग होता है। 


       पूर्ति अनुसूची या तालिका
        Supply Schedule 
एक विक्रेता बाज़ार में विभिन्न मूल्यों पर वस्तु की भिन्न-भिन्न मात्राओं को बेचना चाहता है। पूर्ति अनुसूची यह बताती है कि एक विक्रेता विभिन्न मूल्यों पर वस्तु की  कितनी मात्रा बेचना चाहता है। पूर्ति अनुसूची में वस्तु की उन सभी मात्राओं को
और उनके अलग-अलग मूल्यों को दर्शाया जाता है। यह तालिका वस्तु की क़ीमत एवं पूर्ति की जाने वाली मात्रा में धनात्मक संबंध ( positive relation) को प्रदर्शित करती है ।
माँग तालिका की तरह पूर्ति तालिका भी दो प्रकार की होती है —
1) व्यक्तिगत पूर्ति तालिका
   Individual Supply Schedule 
2) बाज़ार पूर्ति तालिका
    Market Supply Schedule


1) व्यक्तिगत पूर्ति तालिका
(Individual Supply Schedule) – यह तालिका किसी व्यक्तिगत विक्रेता की विभिन्न अनुमानित क़ीमतों और उन पर पूर्ति की जाने वाली वस्तु की अलग-अलग मात्राओं को प्रदर्शित करती है अर्थात इस तालिका से ज्ञात होता है कि एक विक्रेता विभिन्न मूल्यों पर वस्तु की कितनी मात्रा बेचना चाहता है। 

      

तालिका से स्पष्ट है कि मूल्य में वृद्धि होने पर वस्तु की पूर्ति की जा रही मात्रा में भी वृद्धि हो रही है। 


2) बाज़ार पूर्ति तालिका (Market Supply Schedule) – किसी भी बाज़ार में विक्रेताओं की संख्या एक से अधिक ही होती है और ये सभी विक्रेता किसी समय विशेष में अलग-अलग मूल्यों पर वस्तु की अलग-अलग मात्राओं की पूर्ति करना चाहते हैं। यदि इन सब विक्रेताओं की पूर्ति को जोड़ दिया जाये तो बाज़ार पूर्ति तालिका तैयार हो जायेगी। 

  


   

पूर्ति वक्र या पूर्ति रेखा 

Supply Curve

जब पूर्ति तालिका को रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो इससे हमें पूर्ति वक्र प्राप्त होता है जो कि पूर्ति अनुसूची काDiagrammaticPresentation है। पूर्ति वक्र का ढाल धनात्मक होता है। पूर्ति वक्र भी दो प्रकार का होता है –
1) व्यक्तिगत पूर्ति वक्र 
(Individual Supply Curve)
2) बाज़ार पूर्ति वक्र 
(Market Supply Curve)



1) व्यक्तिगत पूर्ति वक्र 
(Individual Supply Curve)–
 व्यक्तिगत फ़र्म की पूर्ति अनुसूची को जब रेखाचित्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है तो व्यक्तिगत पूर्ति वक्र प्राप्त होता है।पूर्ति रेखा बाएँ से दाएँ ऊपर की ओर बढ़ती है।

 
व्यक्तिगत पूर्ति वक्र 


पूर्ति वक्र की धनात्मक ढाल वस्तु के मूल्य और पूर्ति की गयी मात्राओं के बीच प्रत्यक्ष
सम्बन्ध को दर्शाता है। 


2) बाज़ार पूर्ति वक्र 
(Market Supply Curve) बाज़ार में शामिल सभी फ़र्मों की पूर्ति तालिका के चित्रात्मकपप्रदर्शन को बाज़ार पूर्ति वक्र कहते हैं यह रेखा भी बाएँ से दाएँ ऊपर की ओर बढ़ती है।

 



पूर्ति के निर्धारक तत्व 

Determining Factors of Supply 

 किसी वस्तु की पूर्ति को विभिन्न घटक निर्धारित करते हैं जिनमें से कुछ प्रत्यक्ष रूप से और कुछ अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ति को प्रभावित करते हैं। पूर्ति को प्रभावित करने वाले मुख्य तत्व या घटक निम्नलिखित हैं –

1) वस्तु का मूल्य ( price of commodity) – किसी वस्तु के मूल्य एवं उसकी आपूर्ति में प्रत्यक्ष संबंध होता है मूल्य बढ़ने के साथ आपूर्ति बढ़ती है और मूल्य में कमी आने पर आपूर्ति भी कम हो जाती है। 

2)सम्बंधित वस्तुओं का मूल्य (Price of Related Goods) – किसी वस्तु की आपूर्ति उसकी सम्बंधित वस्तुओं की क़ीमत पर निर्भर करती है। किसी वस्तु की दो प्रकार की सम्बंधित वस्तुएं होती हैं स्थानापन्न तथा पूरक । दोनों प्रकार की वस्तुओं के मूल्य में आने वाला बदलाव वस्तु की आपूर्ति पर प्रभाव अवश्य डालता है। 
i) स्थानापन्न या वैकल्पिक वस्तु (Substitute) – जिन वस्तुओं को मुख्य वस्तु के स्थान पर उपयोग में लाया जा सकता है उन्हें स्थानापन्न या वैकल्पिक वस्तु कहा जाता है। जैसे पेप्सी, कोका कोला, माउंटेन ड्यू तथा चाय एवं
कॉफी आदि। यदि वैकल्पिक वस्तु की क़ीमत बढ़ती है तो उत्पादक वैकल्पिक वस्तु का उत्पादन बढ़ा देते हैं जिससे ज़्यादा लाभ हासिल कर सकें इस तरह मुख्य वस्तु की पूर्ति प्रभावित होती है।
ii) पूरक वस्तु (Complementary) –
जिन वस्तुओं का उपयोग एक दूसरे के साथ किया जाता है उन्हें पूरक वस्तु कहते हैं जैसे पेट्रोल और कार। पूरक वस्तुओं की क़ीमत में परिवर्तन का मुख्य वस्तु की पूर्ति पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। यदि कार का मूल्य बढ़ेगा तो पेट्रोल की पूर्ति भी बढ़ जाएगी क्योंकि कार का मूल्य बढ़ने से कार की पूर्ति में वृद्धि होगी और अधिक कारों के लिए पेट्रोल की भी अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी इस तरह पेट्रोल की पूर्ति भी बढ़ जाएगी। 

3) उत्पादन के साधनों का मूल्य (Price of Factors of Production) – उत्पत्ति के साधनों का मूल्य बढ़ने पर उत्पादन पर आने वाली लागत भी बढ़ जाती है जिससे उत्पादक को मिलने वाला लाभ कम हो जाता है  फलस्वरूप वस्तु की पूर्ति कम हो जाएगी
लेकिन वस्तु का मूल्य भी बढ़ गया हो तो फिर पूर्ति पर साधनों का मूल्य बढ़ने का प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उत्पादक को मिलने वाला लाभ भी बढ़ जाएगा 

4) फ़र्म का उद्देश्य (Goal of the Firm) –  किसी वस्तु की पूर्ति इस बात पर भी निर्भर करती है कि उत्पादक किस उद्देश्य के लिए वस्तु को विक्रय करना चाहता है अगर वह बाज़ार में अपना अधिकार जमाना चाहता है तो फिर कम लाभ मिलने पर भी वह पूर्ति ज़्यादा से ज़्यादा करेगा। यदि फ़र्म केवल अधिकतम लाभ कमाना चाहती है तो वह वस्तु की पूर्ति तभी करेगी जब बाज़ार में वस्तु की क़ीमत ज़्यादा होगी। 

5)तकनीकी स्तर (Level of Technique) – नई तकनीक के प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि होती है और उत्पादन लागत घटती है साथ ही उत्पादक को मिलने वाला लाभ भी बढ़ जाता है इसी वजह से वस्तुु की पूर्ति में वृद्धि होती है। अगर आधुनिक तकनीक का प्रयोग न किया जाए तो वस्तुु की पूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़़ता है। 

6) सरकार की कर - नीति  
( Government policy) – यदि सरकार किसी वस्तुु के उत्पाद कर को कम करती है तो उस वस्तुु के उत्पादन में आने वाली लागत भी कम हो जाती है जिससे उत्पादक वस्तुु का उत्पादन बढ़ा देंगे फलस्वरुप पूर्ति भी बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ यदि सरकार किसी वस्तु पर अधिक कर लगाती है तो वस्तु की उत्पादन लागत बढ़ जाती है एंव उत्पादक को लाभ कम प्राप्त होता है ।जिन वस्तुओं पर अधिक कर लगाया जाता है उनकी  पूर्ति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़़ता है और पूर्ति
कम होने लगती है। 

7) व्यावसायिक आशा ( Business Expectations) – यदि भविष्य में किसी वस्तुु के मूल्य बढ़ जाने की उम्मीद होगी तो वर्तमान में उस वस्तुु की पूर्ति उत्पादक कम कर देंगे और उसे स्टाॅक कर लेंगे जिससे भविष्य में बढ़ी हुई क़ीमत पर वस्तुु को बेच कर अधिक लाभ प्राप्त कर सकें।                    

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